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Gk/GS शीत युद्ध

शीत युद्ध की समाप्ति के आधुनिक परिणाम,भारत और शीत युद्ध

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Hello READERS आज मैं  आप लोगो के लिए एक महत्वपूर्ण टॉपिक “शीत युद्ध की समाप्ति के आधुनिक परिणाम,भारत और शीत युद्ध ” चर्चा करूँगा | यह आगामी परीक्षाओ के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है| इस टॉपिक से सभी परीक्षाओ मे अवश्य ही कुछ न कुछ पूछा ही जाता है|

शीत युद्ध की समाप्ति से आधुनिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर निम्नलिखित परिणाम हुए हैं
1- इससे विश्व का अंतर्राष्ट्रीय वातावरण सुधरा है|
2- लोकतांत्रिक शक्तियों को बल मिला है| स्वयं रूस में लोकतंत्र की स्थापना हुई है|
3- पूर्वी यूरोप के देशों में लोकतांत्रिक शासकों की स्थापना हुई है|
4-लौहआवरण के घर जाने से अंतर्राष्ट्रीयता की शक्तियों को बल मिला है|
५- निशस्त्रीकरण के प्रयत्नों को बल मिला है|
६- संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता बढ़ी है|
७- जर्मनी का पुर्नाकीकरण हुआ है |
8- रूस और पूर्व साम्यवादी देशों के मुक्त बाजार व्यवस्था को अपनाने से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का विकास हुआ है|


भारत और शीत युद्ध


गुटनिरपेक्ष आंदोलन के रूप में शीत युद्ध के दौर में भारत ने दो स्तरों पर अपनी भूमिका निभाई | एक स्तर पर भारत ने सजग और सचेत रूप से अपने को दोनों महाशक्तियों की खेमेबंदी से अलग रखा |दूसरे, भारत में उपनिवेशों के चंगुल से मुक्त हुए नव स्वतंत्र देशों के महाशक्तियों के खेमे में जाने का पुरजोर विरोध किया|


शीत युद्ध का अंत


सन् 1989 में विश्व इतिहास में चमत्कारी मोड़ आया| शीत युद्ध के मूल कारणों की समाप्ति हो गई| बर्लिन की दीवार का पतन हो गया| जर्मनी का एकीकरण हो गया |वारसा पैक्ट बंद कर दिया गया और दोनों महाशक्तियों के बीच सहयोग के मधुर संबंधों का सूत्रपात हुआ | यह शीत युद्ध की समाप्ति का ही परिणाम था की खाड़ी संकट (1989-1990) के समय सोवियत संघ और अमेरिका ने मिलकर सुरक्षा परिषद प्रस्ताव का समर्थन किया | शीत युद्ध के अंत का मुख्य कारण पूर्वी यूरोप में साम्यवाद का ध्वस्त होना तथा सोवियत संघ में उभरता हुआ आर्थिक एवं राजनीतिक संकट था | सोवियत संघ अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में ही नहीं था | राष्ट्रपति गोर्वाचोव ने सोवियत संघ की स्थिति का यथार्थपरक मूल्यांकन करते हुए शीत युद्ध की राजनीति का परित्याग करना ही हितकारी समझा | आज शीत युद्ध अतीत की वस्तु बन चुका है |


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mahi

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