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इंग्लैंड की क्रांति(रक्तहीन क्रांति) के कारण,महत्व/ परिणाम

इंग्लैंड की क्रांति(रक्तहीन क्रांति) के कारण,महत्व/ परिणाम
इंग्लैंड की क्रांति(रक्तहीन क्रांति) के कारण,महत्व/ परिणाम

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इंग्लैंड की क्रांति(रक्तहीन क्रांति) के कारण,महत्व/ परिणाम

इंग्लैंड की क्रांति(रक्तहीन क्रांति) के कारण,महत्व/ परिणाम-Hello दोस्तों currentshub.com पर आपका फिर स्वागत है. मै आप लोगो को के साथ एक बहुत ही महत्वपूर्ण Topic “इंग्लैंड की क्रांति(रक्तहीन क्रांति) के कारण,महत्व/ परिणाम” शेयर कर रहा हूँ | यह topic परीक्षा की दृष्टी से बहुत ही महत्वपूर्ण है | प्रत्येक परीक्षा में इससे  प्रश्न अवश्य ही पुछा जाता है| यह लेख कुशल शिक्षको के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है | इस टॉपिक से आगामी परीक्षा में प्रश्न अवश्य आने की सम्भावना  है|

इंग्लैंड की क्रान्ति

सम्पूर्ण विश्व के इतिहास मेन इंग्लैंड की क्रान्ति पहली राजनीतिक क्रान्ति थी | जनता राजा के अत्याचारों एवं कठोर धार्मिक अनुशासन से ऊब चुकी थी | इंग्लैंड की क्रान्ति का मूल कारण राजा और संसद के मध्य सत्ता संघर्ष था | 1688 ई० मे इंग्लैंड मे एक ऐसी राजनीतिक क्रान्ति हुई जिसमें हिंसा, रक्तपात, लूट आदि का कोई स्थान नहीं था | इस क्रान्ति के फलस्वरूप इंग्लैंड में सदियों से चली आ रही राजतंत्रीय शासन व्यवस्था की इतिश्री हो गयी | इस क्रान्ति को रक्तहीन क्रान्ति, महान क्रान्ति, गौरवपूर्ण क्रान्ति, शानदार क्रान्ति, श्वेत क्रान्ति आदि नामों से पुकारा जाता है |

क्रान्ति की पृष्ठभूमि 

यह गौरव पूर्ण क्रान्ति स्टुअर्ट वंश के शासक जेम्स द्वितीय (1685-1688 ई०) के शासन काल में हुई | इस क्रान्ति की पृष्ठभूमि इंग्लैंड के राजाओं और संसद के मध्य सत्ता संघर्ष में विधमान थी | इंग्लैंड संसार का पहला देश था जहां सर्वप्रथम संसद की स्थापना हुई थी | 11वी शताब्दी में राजा हेनरी प्रथम ने शासन कार्यों में परामर्श लेने के लिए एक सलाहकार समिति (परिषद) की स्थापना की जिसे ‘क्यूरिया रेजिस’ (राजा की परिषद) कहा गया | धीरे धीरे संसद का रूप धरण कर लिया |

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1215 ई० में रहा जॉन की नीतियों से असंतुष्ट होकर सामंतों (बैरनों) ने एक घोषणा पत्र तैयार किया | राजा को बाध्य होकर 15 जून 1215 को इसे स्वीकार करना पड़ा |

इंग्लैंड की क्रान्ति के कारण 

गौरवपूर्ण क्रांति के कारण

कारण 1: संसद द्वारा अधिकारों के लिए संघर्ष

संसद अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करना चाहती थी तथा राजा के अधिकारों को सीमित व नियंत्रित करना चाहती थी। फलतः राजा और संसद के मध्य संघर्ष प्रारंभ हो गया और इस संघर्ष का अंत शानदार क्रांति के के रूप में हुआ और अंत में संसद ने राजा पर विजय प्राप्त की।

कारण 2: खूनी न्यायालय

चार्ल्स द्वितीय के अवैध पुत्र मन्मथ ने जेम्स द्वितीय के विरुद्ध सिंहासन प्राप्ति हेतु विद्रोह कर दिया। जेम्स ने मन्मथ को युद्ध में पराजित कर दिया तथा बंदी बना लिया। उसे तथा उसके साथियों को न्यायालय द्वारा मृत्युदण्ड दे दिया गया। इसे खूनी न्यायालय कहा गया।

इसी तरह स्कॉटलैंड में अर्ल ऑफ अरगिल ने विद्रोह किया तो इसे भी जेम्स ने कठोरतापूर्वक दबा दिया तथा 300 व्यक्तियों को मृत्युदण्ड दिया तथा 800 लोगों को दास बनाकर वेस्टइंडीज भेज दिया गया। स्त्रियों और बच्चों को भी क्षमा नहीं किया गया। इस क्रूरता से जनता रुष्ट हो गयी।

कारण 3: जेम्स द्वितीय की निष्फल विदेश नीति

जेम्स द्वितीय फ्रांस के कैथोलिक राजा लुई- 14 से आर्थिक और सैनिक सहायता प्राप्त कर इंग्लैंड में अपना निरंकुश और स्वेच्छाचारी शासन स्थापित करना चाहता था। लुई कैथोलिक था और प्रोटेस्टेटों पर अत्याचार करता था। इससे ये प्रोटेस्टेंट इंग्लैण्ड में आकर शरण ले लिया। अतः इंग्लैण्ड वासी और संसद सदस्य नहीं चाहते थे कि जेम्स लुई से मित्रता रखे। अतः वे उसके विरोधी हो गये।

 
कारण 4: कैथोलिक धर्म का प्रसार 

जेम्स  कैथोलिक धर्म का अनुयायी था जबकि इंग्लैंड की अधिकांश जनता एंग्लिकन मत की थी। वह कैथोलिकों को अधिक सुविधाएँ देता था तथा अनेक महत्वपूर्ण पदों पर भी उन्हें ही नियुक्त करता था। उसने लंदन में अनेक कैथोलिक गिरजाघर भी स्थापित किये। इससे इंग्लैण्ड की जनता उसकी विरोधी हो गई।

कारण 5: विश्वविद्यालयों में हस्तक्षेप

कैथोलिक होने के कारण जेम्स ने विश्वविद्यालयों में भी ऊंचे पदों पर कैथोलिकों को नियुक्त किया। क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय पद में भी कैथोलिक को नियुक्त किया। इससे प्रोटेस्टेंट समुदाय के लोग जेम्स के विरोधी हो गये।

कारण 6: धार्मिक अनुग्रहों की घोषणाएँ

जेम्स द्वितीय ने इंग्लैण्ड को कैथोलिकों का देश बनाने के लिए दो बार धार्मिक अनुग्रहों की घोषणा की। इससे संसद में भारी असंतोष व्याप्त हो गया और वह इसकी घोर विरोधी हो गई।

कारण 7: कोर्ट ऑफ हाई कमीशन की स्थापना

जेम्स ने 1686 में कोर्ट ऑफ हाई कमीशन को पुन: स्थापित किया जिसके अन्तर्गत कैथोलिक धर्म की अवहेलना करने वालों पर मुकदमा चलाकर उनको दण्डित किया जाता था।

अधिकार घोषणा पत्र (बिल औफ़ राइट्स)

गौरव पूर्ण क्रान्ति के पश्चात 1689 ई० में संसद में एक अधिकार विधेयक पास किया गया | उसका उद्देश्य राजा और संसद के अधिकारियों का निर्धारण करना था | जिसके कुछ तथ्य निम्नलिखित हैं –

  1. राजा संसद के बिना तथा संसद राजा के बिना कोई नियम नहीं लागू कर सकती है |
  2. राजा संसद के बिना कोई कर नहीं लगा सकता है |
  3. सेना भर्ती संसद के स्वीकृति से ही होगी |
  4. दंड, जुर्माने आदि अधिकार राजा से ले लिए गए |
  5. बर्ष में एक बार संसद अधिवेशन अनिवार्य रूप से होगा |
  6. वित्त तथा सेना पर संसद का अधिकार होगा |

गौरवपूर्ण क्रांति का महत्व/ परिणाम

जेम्स द्वितीय की पहली पत्नी की मेरी नामक एक पुत्री हुई वह प्रोटेस्टेंट थी तथा हालैण्ड के राजकुमार विलियम को ब्याही थी वह भी प्रोटेस्टेंट था। इंग्लैण्डवासियों को विश्वास था कि वही इंग्लैण्ड की शासिका  बनेगी। अतः जेम्स के अत्याचारों से त्रस्त होकर मेरी और विलियम को बुलाया तथा उनके सम्मुख कुछ शर्ते रखी जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया तथा इसके साथ ही 13  फरवरी, 1689 को विलियम तथा मेरी संयुक्त रुप से इंग्लैण्ड के राजसिंहासन पर आसीन हुए।

World History: Revolution in England | विश्व इतिहास: इंग्लैंड में क्रांति

  • इंग्लैंड में गृह युद्ध चाल्र्स प्रथम के शासनकाल में 1642 ई. में हुआ.
  • इंग्लैंड में गौरवपूर्ण क्रांति 1688 ई. में हुई। उस समय इंग्लैंड का शासक जेम्स द्वितीय था।
  • सौ वर्षीय युद्ध इंग्लैंड एवं फ्रांस के बीच हुआ था।
  • गुलाबों का युद्ध इंग्लैंड में हुआ।
  • इंग्लैंड के सामन्तों ने राजा जॉन को सन् 1215 ई. में एक अधिकार-पत्र पर हस्ताक्षर करने को मजबूर किया। इस अधिकार पत्र को मैग्माकार्टा कहा जाता है। यह सर्वसाधारण के अधिकारों का घोषणा-पत्र था।
  • ट्यूडर वंश के शक्तिशाली राजाओं के शासनकाल में संसद उनके हाथों की कठपुतली बनी रही।
  • एलिजाबेथ प्रथम का संबंध ट्यूडर वंश से था।
  • इंग्लैंड में गृह युद्ध सात वर्षों तक चला।
  • इंग्लैंड के राजा चाल्र्स प्रथम को फाँसी की सजा दी गयी।
  • गृह युद्ध के दौरान राजा के समर्थकों को कैवेलियर कहा गया था और संसद के समर्थकों को राउंडहेड्स कहा गया।

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