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प्रमुख जनजातीय विद्रोह Tribal Movements of India in hindi

प्रमुख जनजातीय विद्रोह Tribal Movements of India in hindi
प्रमुख जनजातीय विद्रोह Tribal Movements of India in hindi

प्रमुख जनजातीय विद्रोह Tribal Movements of India in hindi

प्रमुख जनजातीय विद्रोह Tribal Movements of India in hindi– हेलो दोस्तों आप सब छात्रों के समक्ष “प्रमुख जनजातीय विद्रोह Tribal Movements of India in hindi जनजातीय (आदिवासी) विद्रोह क्या था? यह क्यों हुआ था ”इत्यादि के बारे में बतायेंगे. जो छात्र SSC, PCS, IAS, UPSC, UPPPCS, Civil Services  या अन्य Competitive Exams की तैयारी कर रहे है है उनके लिए ये ‘ जनजातीय विद्रोह Tribal Movements पढना काफी लाभदायक साबित होगा. 

जनजातीय (आदिवासी) विद्रोह क्या था?

1857 ईस्वी की क्रांति के पहले तथा बाद में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध कई विद्रोह हुए। ब्रिटिश राज्य की स्थापना के बाद भू-राजस्व प्रणाली, प्रशासनिक तथा न्यायिक प्रणाली के परिवर्तन से जनजातीय समाज प्रभावित हुआ। वन संपत्ति पर अधिकार करके उसकी सुरक्षा के लिए जनजातीय समाज के लोगो पर विभिन्न प्रकार के कर लगाये जाते थे तथा उनसे बेगार ली जाती थी। आक्रोशित जनजातीय लोगो के प्रतिरोध का दमन अंग्रेजी सरकार द्वारा बड़ी क्रूरता से किया गया जिसके फलस्वरूप या विरोध सशस्त्र विद्रोह में बदल गया।
 
पूर्वी भारत- खासी, कोल, संथाल, मुंडा, कुकी, खोंड, नागा, सिंगो।
पश्चिमी भारत- भील रामोसी
दक्षिण भारत- कोरा माल्या एवं कोंडा डोरा।

प्रमुख जनजातीय विद्रोह

प्रमुख जनजातीय विद्रोह

जनजाति

प्रभावित क्षेत्र

वर्ष

नेतृत्व

विद्रोह का परिणाम 

  1. चुआर

नानभूम व बारभूम (पश्चिम बंगाल)

1768 व 1832

राजा जगन्नाथ 

चुआरो द्वारा ब्रिटिश सत्ता का विरोध | अंग्रेजो द्वारा सुलह व सेना बल द्वारा विद्रोह का दमन |

  1. भील

खानदेश

1818-48

सेवरम त्रयम्बक 

खानदेश पर 1818 ई. में ब्रिटिश अधिकार के बाद विद्रोह की शुरुआत | उनके द्वारा 30 वर्षों तक अंग्रेजों का विरोध | सेना द्वारा  विद्रोह का दमन |

  1. हो 

सिंहभूम व छोटानागपुर

1820,1822,1832

राजा पराहत

सिंहभूम पर ब्रिटिश कब्ज़ा तथा हो विद्रोह को सेना द्वारा दमन | 1832 ई. में पुनः विद्रोह 

  1. कोली 

सहयाद्री पहाड़ी (गुजरात व महाराष्ट्र)

1824,1828,1839 व 1844-48

भाऊसरे, चिमना जी जादव व नाना दरबारे

कोली विद्रोह तथा उनके सभी नेताओं को अंततः पकड़कर विद्रोह का दमन |

  1. खासी

खासी पहाड़ी (असम व मेघालय)

1829-32

राजा तीरथ सिंह, मुकुंद सिंह व बार मानिक 

अपने क्षेत्रों से अंग्रेजों को बाहर निकालने का असफल खासी प्रयास; सभी खासी प्रमुखों का आत्मसमर्पण जिनमे तीरशु सिंह भी था |

  1. सिंहपो 

असम

1830-39

रनुआ गोसाई 

1830 ई. के विद्रोह का गर्नल न्युफिवले द्वारा दमन; असम के अंग्रेज राजनैतिक एजेंट कर्नल ह्वाइट द्वारा 1839 को सिंहपो द्वारा हत्या पर अंत में उनकी पराजय | 

  1. कोल

छोटा नागपुर

1831-32

च बुद्धो भगत व गंगा नारायण 

व्यापक सैनिक कार्यवाही के बाद अंग्रेजों द्वारा विद्रोह का दमन तथा भगत की मृत्यु |

  1. कोया 

रंपा क्षेत्र (आंध्रप्रदेश में चोदवरम)

1840-45

1879-80, 1922-24

अल्लुरी सीतारामराजू

कोया विद्रोह जिनमे से 1879-80 ई. व 1922-24 ई. के प्रमुख; अंग्रेजों द्वारा मई 1924 ई. में राजू को पकड़कर फांसी दी गई |

  1. खोंड

खोंडमल (उड़ीसा)

1846-48, 1855

चक्र बिसाई

बिसाई के नेतृत्व में प्रारंभ | विद्रोहों की अंग्रेजों ने अत्यंत कठिनता से दमन किया |

  1. संथाल

राजमहल पहाड़ी (बिहार)

1855-56

सिद्ध व कान्हू

संथालों का विद्रोह तथा उनकी अपनी सरकार स्थापित; संथालों द्वारा मेजर बरो के नेतृत्व में अंग्रेजों की पराजय; प्रभावी क्षेत्र सेना को सुपुर्द तथा 1856 ई. के अंत तक विद्रोह का दमन; भविष्य में संथालों का विद्रोह रोकने हेतु संथाल परगना जिला निर्मित किये |

  1. नायकदा

पंचमहल (गुजरात)

1858-59 व 1868

रूपसिंह व जोरिआ भगत

रूपसिंह के नेतृत्व में 1858 ई. में नायकदो का विद्रोह | रूपसिंह तथा अंग्रेजों के बीच संधि (1859) | 1868 ई. में उनका पुनः विद्रोह तथा एक राज्य की स्थापना जिसका अध्यात्मिक प्रमुख जोरिआ | धार्मिक प्रमुख रूपसिंह; जोरिआ | रूपसिंह को पकड़कर फांसी व विद्रोह का दमन |

  1. मुंडा

छोटानागपुर

1899-1900

बिरसा मुंडा

एक नए धार्मिक सम्प्रदाय की बिरसा द्वारा स्थापना जिसका वास्तविक प्रमुख देवता सिंह बोंगा था; बिरसा के उपदेशों के कारण अंग्रेजों में भय; बिरसा मुंडा को पकड़कर बंदी बनाया गया; बिरसा की मुक्ति तथा उसका उपदेश प्रारंभ; मुंडों द्वारा विद्रोह में गिरजाघरों व पुलिस थानों पर आक्रमण | अंग्रेजों द्वारा मुंडों की पराजय तथा बिरसा की गिरफ्तारी हैजा के कारण जून 1900 ई. में जेल में मृत्यु |

  1. भील

बांसवाड़ा एवं डूंगरपुर (दक्षिण राजस्थान)

1914-15

जनना भगत

यह शुद्धी आंदोलन के रूप में प्रारंभ हुआ लेकिन बाद में एक राजनैतिक आंदोलन में बदल हो गया; ब्रिटिश सैनिक हस्तक्षेप के कारण उनके द्वारा भील राज्य स्थापित करने के प्रयास असफल |

  1. थाओडे कूकी

मणिपुर

1917-19

जादोनांग व रानी गेदिनिलउ

अंग्रेजों के विरुद्ध उनका विद्रोह व 2 वर्षों तक गुरिल्ला युद्ध हुए |

  1. चेंचू

नल्ल्मल पहाड़ी (आंध्रप्रदेश )

1921-22

हनुमंथु

जंगलों पर बढ़ते ब्रिटिश नियंत्रण के कारण उनका विद्रोह हुआ था |

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shubham yadav

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