गृहविज्ञान

अनियन्त्रित सहभागी अवलोकन एवं नियंत्रित अवलोकन क्या है?

अनियन्त्रित सहभागी अवलोकन एवं नियंत्रित अवलोकन
अनियन्त्रित सहभागी अवलोकन एवं नियंत्रित अवलोकन

अनियन्त्रित सहभागी अवलोकन क्या है?

अनियन्त्रित अवलोकन को निम्नलिखित तीन भागों में बाँटा जा सकता है-

(1) सहभागिक अवलोकन

(2) असहभागिक अवलोकन

(3) अर्द्ध सहभागिक अवलोकन

अनियन्त्रित सहभागिक अवलोकन में अवलोकनार्थ उस समूह में जिसका कि उसे अध्ययन करना है, जाकर बस जाता है, उस समूह की सभी क्रियाओं में समूह के सदस्य के रूप में भागीदार बनता है और साथ ही साथ अवलोकन करता है। इसलिये इसे सहभागिक अवलोकन कहा गया है। प्रो. जान मैज का कथन है कि “जब अवलोकनकर्ता के हृदय की धड़कनें समूह के अन्य व्यक्तियों के हृदयों की धड़कनों से मिल जाती हैं और वह बाहर से आया कोई अनजाना नहीं रह जाता तो यह जानना चाहिए कि उसने सहभागी अवलोककर्ता कहलाने का अधिकार प्राप्त कर लिया हैं।

अर्द्ध सहभागी निरीक्षण किसे कहते हैं?

प्रो. गुड एवं हॉट ने सहभागी एवं असहभागी इन दोनों के मध्यवर्ती मार्ग को अपनाने का सुझाव दिया है जिसको कि अर्द्ध सहभागी निरीक्षण कहा जाता है। इस प्रकार के निरीक्षण में अनुसन्धानकर्ता अध्ययन किये जाने वाले समुदाय के कुछ साधारण कार्यों में भाग भी लेता है यद्यपि अधिकांशतः वह तटस्थ भाव से बिना भाग लिए उनका निरीक्षण करता है। प्रो. विलियम ह्वाइट का कहना है कि हमारे समाज की जटिलता के कारण पूर्ण एकीकरण का दृष्टिकोण अव्यावहारिक रहता है। एक वर्ग के साथ एकीकरण से उसका सम्बन्ध अन्य वर्गों से समाप्त हो जाता है इसलिए अर्द्ध-तटस्थ नीति ही बनाए रखना अधिक उत्तम होता है जैसे सामाजिक उत्सवों में भाग लेना, गेंद फेंकना, खेलना, साथ-साथ खाना-पीना और फिर भी यह स्थिति बनाए रखना कि हमारा मुख्य उद्देश्य अनुसन्धान है।

असहभागी अवलोकन

असहभागी निरीक्षण में निरीक्षणकर्ता निरीक्षण किये जाने वाली सामाजिक घटना या जीवन से तटस्थ रहकर तत्वों का संकलन करता हैं। सामूहिक जीवन में भागेदारी नहीं ग्रहण करता हैं। असहभागी अनियन्त्रित निरीक्षण का अति उत्तम रूप हैं। इसमें निरीक्षण की जाने वाली सामाजिक घटना पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार का नियन्त्रण, दखलन्दाजी या कृत्रिमता नहीं होती हैं। निरीक्षणकर्ता समुदाय या समूह से दूर रहकर उसकी स्वाभाविक जीवनविधि को देखता व अध्ययन करता हैं। निष्पक्ष व पूर्णरूपेण स्वतन्त्रता पूर्वक अध्ययन इस प्रविधि की उल्लेखनीय विशेषता हैं पीटर एच० मन ने संकेत किया है कि असहभागी निरीक्षण वह प्रविधि है जिसके अन्तर्गत एक निरीक्षणकर्ता निरीक्षित व्यक्तियों में छिपा रहता हैं और व्यक्ति जिनका कि अवलोकन करता हैं स्वच्छन्द एवं प्राकृतिक रूप से व्यवहार प्रतिमान प्रदर्शित करते हैं। स्पष्ट है इसमें साधारणतया अभिमति या पक्षपात की संभावना न के बराबर होती हैं।

असहभागी निरीक्षण के गुणों को लिखिए

(1) असहभागी निरीक्षण में निरीक्षणकर्ता सामूहिक या सामुदायिक जीवन से तटस्थ रहने के कारण भावुकता से वंचित रहता है और उसका निरीक्षण वस्तुनिष्ठ होता हैं। निरीक्षणकर्ता के व्यक्तिगत विचारों के समावेश की संभावना घट जाती हैं।

(2) असहभागी निरीक्षण में निरीक्षणकर्ता समूह के व्यक्तियों की स्वाभाविक गतिविधियों का अवलोकन करता हैं। प्रश्नोत्तर के काल में शायद सदस्य वास्तविक बातों को छिपाकर रखे या उनके व्यवहार में तोड़-मरोड़ की प्रवृत्ति आ जाए। इस प्रकार असहभागी निरीक्षण अधिक विश्वसनीय होता है। इस प्रविधि में निरीक्षणकर्ता स्वयं ही सब कुछ देखने का प्रयास करता है।

(3) असहभागी निरीक्षणकर्ता प्रायः समूह में सम्मान का पात्र होता है। समूह के सदस्य उसको एक सामान्य व्यक्ति न मानकर, जासूस न मानकर, सामूहिक जीवन में आक्रान्ता न मानकर एक अध्ययनकर्ता व वैज्ञानिक मानते हैं। समूह के सदस्य यथासम्भव सहयोग प्रदान करते हैं। सामुदायिक जीवन के निरीक्षण के लिए वर्षों नहीं व्यतीत करना पड़ता हैं।

(4) असहभागी निरीक्षण में अपेक्षाकृत धन तथा समय की बर्बादी कम होती हैं।

नियंत्रित अवलोकन क्या हैं?

नियन्त्रित अवलोकन नियन्त्रित निरीक्षण पूर्व नियोजित निरीक्षण कहे जा सकते हैं – क्योंकि निरीक्षण के पूर्व ही घटनास्थिति को नियन्त्रित कर लिया जाता हैं। नियन्त्रण के माध्यम से अनियन्त्रित निरीक्षण की अनेक कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया हैं। इस प्रविधि में निरीक्षणकर्ता तथा निरीक्षण की जाने वाली सामाजिक दशा दोनों पर पूर्ण नियन्त्रण रखा जाता है। नियन्त्रित अवलोकन में अध्ययनकर्ता स्वयं या घटना पर योजनाबद्ध रूप से नियन्त्रण रखता हैं, वह वास्तविक स्थिति एवं प्राप्त सामग्री के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता हैं। इस विधि में तटस्थता तथा वैषयिकता बनी रहती हैं। तथ्यों का सत्यापन भी आसान होता है। इसमें साधन स्वयं ही सामग्री का संग्रहण करते हैं, इस अवलोकन में तथ्यों का संकलन निश्चित एवं पूर्व नियोजित होता है। इस अवलोकन को संरचित अवलोकन या व्यवस्थित अवलोकन भी कहते हैं, इसमें निम्न बातों को स्पष्ट किया जाता है:

1. अवलोकित की जाने वाली सामग्री की स्पष्ट परिभाषा।

2. अवलोकन की दशाओं, व्यक्तियों, समय तथा स्थान का निर्धारिण

3. अवलोकन से सम्बन्धित तथ्यों का चुनाव।

4. सूचियों को लेखबद्ध करना।

5. अवलोकन में प्रयुक्त होने वाले यन्त्रों का निर्धारण।

नियन्त्रित और अनियन्त्रित अवलोकन में अन्तर

1. नियन्त्रित अवलोकन में घटनाओं या परिस्थितियों पर नियन्त्रण रखकर अध्ययन किया जाता हैं। अनियन्त्रित अवलोकन में घटनाओं को उनके स्वाभाविक एवं स्वतन्त्र रूप में देखा जाता हैं।

2. नियन्त्रित अवलोकन में एक पूर्व-नियोजन के अनुसार अध्ययन करना होता हैं। अनियन्त्रित अवलोकन में पूर्व नियोजन की कोई आवश्यकता नहीं होती हैं।

3. नियन्त्रित अवलोकन में कृत्रिमता या बनावटीपन आ जाता हैं। अनियन्त्रित अवलोकन में स्वाभाविकता विद्यमान रहती हैं।

4. नियन्त्रित अवलोकन में अनुसूची, मानचित्र, टेप, फिल्म, एवं फोटोग्राफ आदि का प्रयोग किया जाता हैं। अनियन्त्रित अवलोकन में ऐसा कुछ आवश्यक नहीं हैं।

5. नियन्त्रित अवलोकन में अध्ययनकर्ता का अध्ययन सीमित होता हैं। अनियन्त्रित अवलोकन में अध्ययनकर्ता का अध्ययन गहन एवं सूक्ष्म होता हैं।

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shubham yadav

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