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नगरीकरण का अर्थ, नगरीकरण की परिभाषा, नगरीकरण की विशेषताएं और नगरीकरण के प्रभाव

नगरीकरण (शहरीकरण)

नगरीकरण का अर्थ-शहरीकरण का तात्पर्य शहरो के भौतिक विकास में वृद्धि, षहरो में जनसंख्या का केन्दिकरण है। शहरीकरण आज विकास का साधन तो है परन्तु साथ ही साथ यह एक वैष्विक आर्थिक, सामाजिक एंव पर्यावरणीय समस्या उत्पन्न कर रही है।

आज के इस लेख मे हम नगरीकरण का अर्थ, नगरीकरण की परिभाषा, नगरीकरण की विशेषताएं और नगरीकरण के प्रभाव जानेंगे।

नगरीकरण का अर्थ, नगरीकरण की परिभाषा, नगरीकरण की विशेषताएं और नगरीकरण के प्रभाव

नगरीकरण का अर्थ, नगरीकरण की परिभाषा, नगरीकरण की विशेषताएं और नगरीकरण के प्रभाव

नगरीकरण का अर्थ

ग्राम से नगर बनने की प्रक्रिया को नगरीकरण (शहरीकरण) कहा जाता है। नगरीकरण का तात्पर्य उस प्रक्रिया से है जो अधिवासित प्रारूप में गत्यात्मक परिवर्तन लाता है। यह परिवर्तन मूलतः जनसंख्या आकार, संरचना और कार्यिक क्षेत्र में होता है। कार्यिक दृष्टि से नगरीय अधिवासित क्षेत्रों में गैर-प्राथमिक कार्यों की प्रधानता होती है। आधुनिक काल में नगरीकरण की प्रक्रिया में विकास का मुख्य कारण औद्योगिक क्रांति और तकनीकी विकास रहा है। 20वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में विकसित देशों में नगरीकरण की प्रक्रिया तीव्र थी, परन्तु इसके उत्तरार्द्ध में जनसंख्या विस्फोट एवं ग्रामीण-नगरीय स्थानान्तरण के कारण विकासशील देशों में यह प्रक्रिया तीव्र हो गई है। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार विश्व के नगरों की जनसंख्या में वार्षिक वृद्धि का एक-तिहाई से भी अधिक भाग ग्रामीण-नगरीय स्थानान्तरण का परिणाम है। यह स्थानान्तरण मुख्य रूप से राजधानी नगरों एवं महानगरों की ओर होता है। इसे ही Secular Shift of Population कहा गया है। जहाँ विकसित देश नगरीय संतृप्तता को प्राप्त कर रहे हैं, वहीं विकासशील देशों में अभी भी नगरीकरण का स्तर अल्प है। अतः आगामी वर्षों में वहाँ नगरीकरण की प्रक्रिया और भी तीव्र होने की संभावना है।
नगरीकरण के अर्थ को और भी अच्छे से समझने के लिए हम नगरीकरण की विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई परिभाषों को जानेंगे।

नगरीकरण की परिभाषा

श्री निवास के अनुसार “नगरीकरण से तात्पर्य केवल सीमित क्षेत्र में जनसंख्या वृध्दि से नहीं है वरन् सामाजिक आर्थिक संबंधो में परिवर्तन से है।

किंग्सले डेविस के अनुसार ” नगरीकरण एक निश्चित प्रक्रिया है, परिवेश का वह चक्र है जिससे कोई समाज खेतिहर से औघोगिक समाज में परिवर्तित हो जाता है।”

मारविन ओलसन के अनुसार ” नगरीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत एक समाज के समुदाय के आकार और शक्ति में वृध्दि होती रहती है।

शहरीकरण के प्रमुख कारण

  • शहरोे में रोजगार की उपलब्धता की संभावना।
  • शहरोे में उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना।
  • शहरोे में मनोरंजन, खेल-कूद की सुविधा होना।
  • शहरोे में निवास को प्रतिश्ठा का प्रतीक मानना।
  • सभी मुख्य शसकीय कार्यालयो का शहरो में होना।
  • शहरोे में व्यापार ग्रामिण क्षेत्रो की तुलना अधिक सरल होना।
  • प्रमुख औधोगिक क्षेत्र व ईकाइयो का शहरो में होना।

नगरीकरण की विशेषताएं (nagrikaran ki visheshta)

नगरीकरण की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार है–

1. उद्योगों का केन्द्रयकरण बड़े नगरों मे दृष्टिगोचर होता है।
2. नगरीकरण नगर बनने की प्रक्रिया है।
3. नगरीकरण की प्रक्रिया मे नये नगर बनते हैं एवं महानगरों की उत्पत्ति होती है।
4. कम स्थान में अधिक व्यक्ति निवास करते है।
5. नगरीकरण की प्रक्रिया के दौरान नगरों मे निवासरत व्यक्ति नगरीय जीवन शैली को आत्मसात कर लेते हैं।
6. शिक्षितों की संख्या का अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक होता है।
7. अनौपचारिक संबन्ध औपचारिक सम्बन्धों मे परार्वतति होने लगते है।
9. भिन्न-भिन्न संस्कृतियों, भाषाओं एवं धर्म के लोग एक साथ रहने लगते है।
10. औद्योगिकरण की प्रक्रिया होने लगती है।

नगर के विकास की अवस्थाएँ

लुइस मम्फोर्ड ने 1938 ई. में नगरों के विकास की 6 अवस्थाओं का उल्लेख किया है :-

1. प्राकृतिक नगर (Eopolis) : यह नगर के विकास की प्राथमिक अवस्था है। इसमें उसकी आकारिकी का विकास अभी नहीं हुआ होता है।

2. सभ्य नगर (Polls) : इस अवस्था में नगर की आकारिकी का विकास हो जाता है एवं कार्यों का विशेषीकरण लगता है।

3. महानगर (Metropolis) : मेट्रोपोलिस इस अवस्था में नगर का आकार वृहत् हो जाता है एवं उसके उपनगर विकसित होने लगते हैं।

4.विकसित नगर (Megalopolis) : जब बड़े नगर के पृष्ठ प्रदेश भी नगरीकृत होने लगते हैं तथा सम्पूर्ण प्रदेश में नगरीय संस्कृति का विस्तार मिलता है। विश्व के तीन प्रमुख मेगालोपोलिस हैं:

i) टोकियो – याकोहामा – कावासाकी क्षेत्र
ii) बोस्टन – रिचमोण्ट – बाल्टीमोर
iii) रॉटरडम क्षेत्र

5. अनियमित नगर (Tyranopolis) : इस अवस्था में बड़े नगर के पार्श्व का पतन प्रारम्भ हो जाता है। जैसे-लंदन, पेरिस, रोम आदि।

6. कीर्तिशेष नगर (Nekropolis) : इस अवस्था में नगर इतिहास के पन्नों तक सीमित रह जाता है, केवल उसके अवशेष मात्र मिलते हैं। जैसे-कन्नौज, हम्पी।

टोकियो-याकोहामा विश्व का सबसे बड़ा नगर है। उसके बाद न्यूयार्क (सं. रा. अमेरिका), सियोल-इंचन (दक्षिणी कोरिया), मैक्सिको सिटी (मैक्सिको), साओपोलो (ब्राजील), मुम्बई (भारत), ओसाका-कोबे-क्योटो (जापान), लांस एंजिल्स (सं. रा, अमेरिका), मनीला (फिलीपींस), कैरो (मित्र),कोलकाता व दिल्ली (भारत), शंघाई व बीजिंग (चीन),रियो-डि-जेनेरियो (ब्राजील) व मास्को (रूस) का स्थान आता है। ये सभी 1 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले नगर हैं।

नगरीकरण के प्रभाव

भारत में नगरीकरण के प्रभाव इस प्रकार से हैं–

1. ग्रामीण जीवन पर प्रभाव
नगरीकरण ने ग्रामीण जीवन को प्रभावित किया है। ग्रामीण लोग शहर की और उद्योगोन्मुखी व्यवसायों, शिक्षा आदि सुविधाओं के लिए नगर की ओर आकृष्ट हो रहे है।

2. जीवन में कृत्रिमता
नगरीकरण के कारण आज जीवन में वास्तविकता नही रही है। नगरीकरण से पूर्व मानव ‘सादा जीवन उच्च विचारों में विश्वास रखता था लेकिन उसका झुकाव कृत्रिमता की ओर होता जा रहा है। मानव जीवन मे अब कृत्रिमता आ गई है अब वह दिखावे एवं शान-शौकत में अधिक विश्वास रखने लगा है।

3. सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन
नगरीकरण के फलस्वरूप अब सामाजिक मूल्यों मे परिवर्तन होने लगा है। यह नगरीकरण का एक सामाजिक प्रभाव हैं। व्यक्तिवादी जीवन मूल्यों में सामूहिकता की भावना मे निरंतर कमी होती जा रही है। जीवन में नैतिकता और विश्वास का अभाव होने लगा है और स्वार्थ की भावना बढ़ती जा रही है।

4. धार्मिक जीवन पर प्रभाव
नगरीकरण का धार्मिक जीवन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ रहा है।   धार्मिक विश्वास, परंपरा, कर्मकाण्ड आदि के तौर तरीक बदल ने लगे है। अब अंधविश्वासों को बढ़वा देने वाले तत्व समाप्त होने लगे है। शिक्षा की सहायता से अब वैज्ञानिक और तर्क प्रधान सोच विकसित होने लगी है।

5. मनोरंजन का व्यापारीकरण
ग्रामीण समाज मे मनोरंजन का उद्देश्य धन कामना कभी नही रहा है ग्रामीण समाज मे मनोरंजन तनावमुक्ति एवं साथ-मिलजुकर बैठने के लिए किया जाता है। लेकिन नगरीकरण मे मनोरंजन का उद्देश्य धन कामना रहा है।

6. महिलाओं कि स्थति में परिवर्तन
नगरीकरण के प्रभाव से महिलाओं की स्थिति मे परिवर्तन आने लगे है। अब वह घर के अंदर अपनी लैंगिक भूमिकाओं तक सीमित नही है। बल्कि आर्थिक रूप से भी वह आत्मनिर्भर रहने लगी है। अब शिक्षा एवं राजनीति जैसे क्षेत्रों मे महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।

7. हम की भावना का अभाव
नगरीकरण के कारण अब हम की भावना मे कम आने लगी है। नगरीकयण ने व्यक्तिवादीता को जन्म दिया है। प्रत्येक व्यक्ति यहां केवल अपने ही हित के बारें मे सोचता है।

8. सामाजिक संस्थाओं में परिवर्तन
नगारीकरण के प्रभाव से परिवार और विवाह में निरंतर परिवर्तन बढ़ता जा रहा है। अब संयुक्त परिवार प्रणाली एकल परिवार प्रणाली मे बदलने लगी है। नगरीकरण के प्रभाव से व्यक्तिवादी सोच पनने लगी है।

9. सेवा क्षेत्रों का विकास 
नगरीकरण की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप नगरीय जनसंख्या के प्रबंधन हेतु सेवा क्षेत्रों का विकास हुआ है। कई तरह की शासकीय व अशासकीय सेवाओं मे वृद्धि हुई, जैसे; अस्पताल, पुलिस, न्यायालय, शिक्षण संस्थान, गैर शासकीय संस्थान इत्यादि।

निष्कर्ष

शहरीकरण से विकास तो सम्भव है किन्तु इसके अनियंत्रित विकास से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का भी ध्यान देना आवष्यक है। शहरीकरण  के कारण एक विषेष क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व बहुत अधिक हो जाता है जो अनेक समस्याए उत्पन्न करती है।

इसलिए हमें व सरकार को शहरीकरण  को नियंत्रित करने हेतु कदम उठाने होंगे जिसमें मुख्यतः ग्रामिण  क्षेत्रो का प्रवास रोकने के लिए ग्रामिण क्षेत्रो में भी शहरी क्षेत्रो की तरह उचित सुविधा मुहैया कराना, यातायात की सुचारू रूप से व्यवस्था करना, षहरो में कार पोलिंग का बढ़ावा देना, ग्रामिण क्षेत्रो में उचित रोजगार की व्यवस्था करना।

दोस्तो इस लेख मे हमने नगरीकरण का अर्थ,परिभाषा, विशेषताएं और नगरीकरण के भारतीय समाज पर पड़ने वाले प्रभावों के बारें मे जाना। इस लेख से सम्बन्धित आपका कोई सवाल या प्रश्न है तो नीचे comment कर जरूर बताए।

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shubham yadav

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