Science (विज्ञान)

उच्च रुधिर दाब व निम्न रुधिर दाब में अंतर (Difference Between High Blood Pressure And Low Blood Pressure)

उच्च रुधिर दाब व निम्न रुधिर दाब में अंतर (Difference Between High Blood Pressure And Low Blood Pressure)

उच्च रुधिर दाब व निम्न रुधिर दाब में अंतर (Difference Between High Blood Pressure And Low Blood Pressure)-आज Currentshub.Com आपके लिए विज्ञान के अंतर्गत आने वाला एक महत्वपूर्ण टॉपिक रुधिर दाब क्या है? उच्च रुधिर दाब क्या होता है? निम्न रुधिर दाब क्या होता है? उच्च रुधिर दाब व निम्न रुधिर दाब में अंतर के बारे में बताऊंगा. इससे संबंधी प्रश्न विज्ञान से संबंधित सभी प्रश्न पत्रों में प्रमुखता से सम्मिलित किये जाते है,चलिए इस लेख में उच्च रुधिर दाब व निम्न रुधिर दाब के बारे में तथा इनमें प्रमुख अंतर के बारे में आसान भाषा में समझते हैं।

रूधिर दाब (Blood Pressure)

  • हृदय एक निश्चित दाब से रूधिर को धमनियों में फेंकता (Pump) है, जिसके परिणामस्वरूप रूधिर सीधे रूधिर वाहिनियों में परिभ्रमण करता है। रूधिर के इस दाब को रूधिर दाब कहते है। इस दाब के कारण रूधिर हृदय से शरीर के विभिन्न भागों में पहुंचाता है, और शिराओं द्वारा पुनः ह्रदय में वापस आ जाता है।
  • सर्वप्रथम अंग्रेज वैज्ञानिक स्टेफन हेल्स (Stephen Hales) ने एक घोड़ी के रूधिर दाब को मापा था।
उच्च रुधिर दाब व निम्न रुधिर दाब में अंतर

उच्च रुधिर दाब व निम्न रुधिर दाब में अंतर

आजकल रूधिर दाब को स्फिग्मोमैनोमीटर (Sphygmomanometer) नामक यंत्र द्वारा मापा जाता है। इससे किसी मनुष्य के रूधिर दाब को हवा के दाब से संतुलित कर काँच की नली से भरे हुए पारे के स्तम्भ द्वारा नापा जाता है।

  • हृदय संकुचन (Systole) के समय रूधिर तेजी से धमनियों में प्रवेश करता है। इस समय रूधिर का दाब अधिक होता है। रूधिर के इस दाब को प्राकुंचन रूधिर दाब (Systolic Blood Pressure) कहते है। हृदय शिथिलन (Diastole) के समय रूधिर दाब कम हो जाता है, इसे अनुशिथिलन रूधिर दाब (Diastolic Blood Pressure) कहते है। एक साधारण प्रौढ़ मनुष्य के प्राकुंचन रूधिर दाब 100-140 मिलीमीटर तथा अनुशिथिलन रूधिर 55-80 मिलीमीटर पारे के दाब के बराबर होता है। किसी-किसी मनुष्य में रूधिर अपने निश्चित दाब से अधिक या कम हो जाता है। रूधिर का दाब अधिक होने को उच्च रूधिर दाब (High Blood Pressure) तथा कम होने को निम्न रूधिर दाब (Low Blood Pressure) कहते है। उच्च रक्त दाब को हाइपर टेंशन (Hyper Tension) जबकि निम्न रक्त दाब को हाइपो टेंशन (Hypo Tension) कहते है।

निम्न रक्त चाप व उच्च रक्त चाप (Low Blood Pressure & High Blood Pressure)

  • हृदय के संकुचन या सिस्टोल (Systole) तथा शिथिलन या डायस्टोल (Diastole) के कारण ही रक्त चाप (Blood Pressure) का सृजन होता है। संकुचन या सिस्टोल (Systole) की अवस्था में उत्पन्न रक्त चाप (Blood Pressure) को सिस्टोलिक (Systolic) एवं शिथिलन या डायस्टोल (Diastole) की अवस्था में उत्पन्न रक्त चाप (Blood Pressure) को डायस्टोलिक (Diastolic) कहा जाता है।
  • एक स्वस्थ्य मनुष्य में संकुचन दाब या सिस्टोलिक प्रेशर (Systolic Pressure) 120 मिमी. के दाब के बराबर तथा शिथिलन दाब या डायस्टोलिक प्रेशर (Diastolic Pressure) 80 मिमी. पारे के दाब के बराबर होता है, अर्थात रक्त दाब को 120/80 से दर्शाते है।
  • ब्लड-प्रेशर या रक्त चाप में कमी की अवस्था को लो ब्लड-प्रेशर (Low Blood Pressure) अर्थात निम्न रक्त चाप या हाइपोटेंशन (Hypo Tension) कहते है। इस अवस्था में व्यक्ति का रक्त चाप (Blood Pressure) 100/50 मिमी. पारा (mmHg) होता है, एवं हृदय की संकुचन (Systole) तीव्रता तथा अवस्था में कमी आने के कारण धमनियाँ (Arteries) फैलने लगती है और रुधिर की कमी होने के कारण रक्त चाप (Blood Pressure) कम हो जाता है।
  • निम्न रक्त चाप (Low Blood Pressure) का मुख्य कारण भोजन तथा पानी की कमी, अस्वस्थ्यता, टी.बी. रोग, वमन रोग, उपवास से, एडिसन रोग आदि है। निम्नरक्त चाप वाले व्यक्ति की दृष्टि शक्ति कमजोर, शरीर ठंडा, सिर  पर पसीना, त्वचा पीला, कम मूत्र आना, शरीर में ऐंठन होने लगता है।
  • ब्लड प्रेशर या रक्त चाप में अधिकता की अवस्था को हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) अर्थात उच्च रक्त चाप या हाइपर टेंशन (Hyper Tension) कहते है इस अवस्था में व्यक्ति का रक्त चाप लगातार 150/90 मिमी. पारा (mmHg) होता है।
  • उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) का मुख्य कारण: भय, चिन्ता, अधिक भोजन, दुख, तनाव, मदिरापान, धूम्रपान, मोटापा, नमक का लगातार अधिक प्रयोग, गर्भ निरोधक गोलियों का लगातार सेवन है। उच्च रक्त चाप की अवस्था में व्यक्ति की रुधिर वाहिकाएं (Blood Vessels) कभी-कभी फट जाने से आन्तरिक रक्त स्राव (Internal Bleeding) होने लगती है, जिसके है जिसके कारण कभी-कभी दिल को दौरा (Heart Stroke) या (HeartAttack) को खतरा बढ़ जाता है।

उच्च रुधिर दाब व निम्न रुधिर दाब में अंतर (Difference Between High Blood Pressure And Low Blood Pressure)

उच्च रुधिर दाब

निम्न रुधिर दाब

1. ह्वदय संकुचन के समय धमनियों में रूधिर दाब अधिक होता है। इसे प्रांकुचन रूधिर दाब कहते है। 1. ह्रदय शिथिलन (Diastole) के समय रूधिर दाब का दाब कहते है।
2. सामान्य प्रौढ़ मनुष्य में नार्मल प्रांकुचन रूधिर दाब 100-140 मिलीमीटर पारे के दाब के बराबर होता है। 2. सामान्य प्रौढ़ मनुष्य दाब 55-80 मि.मी. पारे के दाब के बराबर होता है।
3. जब प्रांकुचन रूधिर दाब नार्मल (100-140m.m) से अधिक होता है तो उसे उच्च रूधिर दाब कहते है। 3. जब अनुशिथिलन रूधिर दाब नार्मल से कम होता है तो इसे निम्न रूधिर दाब कहते है।
4. उच्च रूधिर दाब असंतुलित भोजन उत्तेजना, मानसिक आवेश, घबराहट, चिंता अधिक कार्य से होता है। 4. निम्न रूधिर दाब रूधिर में कमी, थकान दुर्बलता, कमजोरी या दीर्घकालीन बीमारियों के कारण होता है
5. उच्च रूधिर दाब के समय रूधिर परसंचरण तीव्र गति से होता है। 5. निम्न रूधिर दाब के समय रूधिर परिसंचरण मंद गति से होता है।
6. हृदय के अपनी कार्यक्षमता से अधिक बल लगाना पड़ता है। 6. इसमें ह्रदय ठीक ढंग से कार्य नहीं कर पाता है।
7. अधिक उच्च दाब के कारण मस्तिष्क की धमनियां फट जाती है, या समय से पूर्व ह्रदय गति रूक जाती है। 7. कम निम्न दाब के कारण विभिन्न अंगों में रूधिर ने पहुंचने से दुर्बलता एवं शक्तिहीनता आ जाती है और ह्रदय गति रूक जाती है।

लो ब्लड प्रेशर हो तो अपनाएं ये घरेलू उपाय-

-अगर आपको लो बीपी है तो नमक थोडा अधिक खाएं। कम ब्लड प्रेशर में एक ग्लास पानी में एक चम्मच नमक घोल कर उसका सेवन करें।
– लो बीपी होने पर कॉफी और चॉकलेट का सेवन करना फायदेमंद होता है।
– 10-15 किशमिश को रात में भिगो कर रख दें और खाली पेट इसका सेवन करें।

हाई ब्लड प्रेशर हो तो अपनाएं ये घरेलू उपाय-

-नमक का सेवन कम कर देना लाभदायक होगा। साधारण नमक की जगह लो-सोडियम सॉल्ट का प्रयोग करें।
– पापड़, आचार, चटनी, नमकीन सलाद और रायते का सेवन कम कर देना चाहिए। इन सब में नमक होता है, खाने के साथ इन सब को लेने से बचना चाहिए।
-वजन कम करें, तनाव में नहीं रहना चाहिए, पर्याप्त नींद लें, शराब बहुत संतुलित मात्रा मे लें और रेशेदार फल और सब्जियों का सेवन करें।

तो दोस्तों, शायद अब आपको “रुधिर दाब क्या है? उच्च रुधिर दाब क्या होता है? निम्न रुधिर दाब क्या होता है? उच्च रुधिर दाब व निम्न रुधिर दाब में अंतर” का कांसेप्ट अच्छे से समझ आ गया होगा, यदि कोई डाउट हो तो आप कमेंट या मेल के माध्यम से अपना डाउट क्लियर कर सकते हैं|

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shubham yadav

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