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पुनर्जागरण का अर्थ और पुनर्जागरण के कारण (Meaning of Renaissance and Causes)

पुनर्जागरण का अर्थ और पुनर्जागरण के कारण
पुनर्जागरण का अर्थ और पुनर्जागरण के कारण

 पुनर्जागरण का अर्थ और पुनर्जागरण के कारण (Meaning of Renaissance and Causes)

 

तीसरी शताब्दी में प्रसिद्ध रोमन साम्राज्य का विभाजन पूर्वी एवं पश्चिमी रोमन साम्राज्य में हो गया, जिसमे पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी कुस्तुनतुनिया जबकि पश्चिमी रोमन साम्राज्य की राजधानी रोम थी | जर्मन आक्रमणकारियों से त्रस्त रोमन साम्राज्य का 5 वीं शताब्दी में अवसान हो गया और यही वह समय था जब यूरोप में मध्यकाल का प्रारम्भ हुआ था सामंतवादी प्रवृत्ति विकसित हुई | मध्यकाल के मुख्य अभिलक्षण थे- राजनितिक सत्ता के रूप में राजतंत्र का पतन एवं सामंतवाद का उद्दभव और विकास, धार्मिक सत्ता तथा सामंत में बेहतर तालमेल एवं उपभोग वर्ग के रूप में उसकी स्थिति, व्यापार-वाणिज्य का पतन तथा समस्त यूरोप में विकास के नाम पर गतिरोध उत्पन्न होना | आमतोर पर इसे अंधकार युग के नाम से जाना जाता है | इसके पश्चात् यूरोप में एक नयी चेतना उदित हुई जिसे पुनर्जागरण का नाम दिया गया |

1.1 पुनर्जागरण का अर्थ (Meaning of Renaissance)

पुनर्जागरण का शाब्दिक अर्थ होता है— ‘फिर से जागना’ | यह वह स्थिति है जब विभिन्न यूरोपीय देशों ने एक लम्बी अवधि के उपरांत मध्यकाल के अंधकार युग को त्याग कर  आधुनिक युग में दस्तक दी | पुनर्जागरण एक बौद्धिक आन्दोलन था जिसकी शुरुआत 14 वीं शताब्दी में इटली से हुई तथा 16 वीं शताब्दी तक इसका प्रसार विभिन्न यूरोपीय देशों, जैसे- जर्मनी, ब्रिटेन आदि में हुआ | पुनर्जागरण के दो आयाम थे- ‘दुनिया की खोज’ तथा ‘मानव की खोज’ | दुनिया की खोज से तात्पर्य यहाँ उन नवीन भौगोलिक खोजों से है जिनके द्वारा अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया की खोज की गयी जबकि मानव की खोज यहाँ पर मध्यकालीन पोपशाही व चर्च के चंगुल में जकड़ी मानव सृष्टि में स्वतंत्र चिंतन शैली के विकास को अभिव्यक्त करती है |

उपर्युक्त सभी प्रवृत्तियों के अनुसार मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि पुनर्जागरण एक ऐसा बौद्धिक एवं उदार सांस्कृतिक आंदोलन था जिसमें प्राचीन यूरोप से प्रेरणा लेकर नए यूरोप का निर्माण किया जा रहा था तथा तार्किक, आलोचनात्मक व अन्वेषणात्मक प्रवृत्तियाँ जन्म ले रही थी परिणामस्वरूप मनुष्य मध्यकालीन बन्धनों से मुक्त होकर स्वतंत्र चिंतन की ओर अग्रसर हुआ जिससे मानव जीवन के विभिन्न पक्षों का उन्नयन हुआ जो उस युग की कला, साहित्य, दर्शन एवं विज्ञान आदि क्षेत्रों में प्रकट हुए |

पुनर्जागरण के विभिन्न पहलुओं में तार्किकता, मानवतावादी दृष्टिकोण, वैज्ञानिक प्रगति आदि का विशेष महत्व है | इससे समस्त यूरोप में सामन्तवाद के खंडहरों पर आधुनिकता का आविर्भाव हुआ |

1.2 पुनर्जागरण के कारण (Causes of Renaissance)

पुनर्जागरण सिर्फ प्राचीन रोम तथा यूनानियों द्वारा प्राप्त उपलब्धियों की एक घटना मात्र नहीं थी बल्कि लगभग दो शताब्दियों के मानवीय प्रयासों का परिणाम था | इसके उदय के कारणों को निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा जाना जा सकता है- 

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shubham yadav

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