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अमेरिकी क्रांति के कारण, घटना एवं प्रभाव-परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

अमेरिकी क्रांति के कारण, घटना एवं प्रभाव
अमेरिकी क्रांति के कारण, घटना एवं प्रभाव

अमेरिकी क्रांति के कारण, घटना एवं प्रभाव-परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

अमेरिकी क्रांति के कारण, घटना एवं प्रभाव-Hello Students, currentshub.com पर आपका स्वागत है जैसे की आप सभी जानते हैं की हम यहाँ पर आपके लिए रोजाना कुछ अच्छा Study Material लेकर आते हैं। उसी तरह आज हम अमेरिकी क्रांति (American Revolution) के विषय (summary) में पढ़ेंगे और संग्राम के कारण (reasons/causes) और परिणामों (results) के बारे में Hindi में जानेंगे. American Revolution के विषय में यह सारी जानकारी NCERT, NIOS और IGNOU Books से इकठ्ठा कर के यहाँ summarize की गयी है.

अमेरिकी क्रांति (American Revolution)

1492 ई. में स्पेन निवासी कोलंबस द्वारा अमेरिका की खोज की गयी | विकास की अपार संभावनाओं के कारण इस क्षेत्र विशेष में यूरोपीय देशों की दिलचस्पी बढ़ने लगी | 18वीं शताब्दी के मध्य तक उत्तरी अमेरिका के अटलांटिक तट के समीपवर्ती क्षेत्रों में ब्रिटेन के अधीन 13 उपनिवेश अस्तित्व में आ चुके थे | ये विविध उपनिवेश एक मिश्रित संस्कृति का आदर्श प्रस्तुत कर रहे थे जिनमे ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, हॉलैंड, पुर्तगाल आदि देशों के भूमिहीन किसान, धार्मिक स्वतंत्रता के आकांक्षी, व्यापारी एवं बिचौलिये आदि जाकर बस गये थे | भौगौलिक दृष्टि से अमेरिका का उत्तरी भाग मत्स्य पालन हेतु, मध्यवर्ती भाग शराब तथा चीनी उद्योग हेतु एवं दक्षिणी भाग कृषि कार्यों के लिए समृद्ध क्षेत्र था | यहाँ अंग्रेज़ जमींदारों के अधीन बड़े-बड़े कृषि फार्म थे जिसमे अफ्रीकी गुलामों की सहायता से खेती (विशेषकर तम्बाकू एवं कपास की खेती) की जाती थी |

अमेरिका स्थित कुल 13 ब्रिटिश उपनिवेशों के प्रत्येक उपनिवेश में शासन का संचालन गवर्नर और उसकी कार्यकारिणी समिति के अधीन विधानसभा द्वारा होता था | गवर्नर ब्रिटिश सरकार के प्रत्यक्ष प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता था | गवर्नर की नियुक्ति ब्रिटिश सत्ता द्वारा की जाती थी एवं उसकी कार्यकारिणी समिति में ब्रिटिश ताज द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे जबकि विधानसभा का गठन विशिष्ट मतदाताओं द्वारा निर्वाचन के फलस्वरूप होता था, जो मुख्य रूप से स्थानीय विषयों से सम्बंधित क़ानून के निर्माण के साथ-साथ कर (Tax) भी लगाती थी | अंततः इस शासन व्यवस्था पर अंतिम और निर्णायक नियंत्रण ब्रिटिश सत्ता का ही होता था तथा ब्रिटिश हितों को ही प्राथमिकता दी जाती थी |

18वीं शताब्दी में इन उपनिवेशों के सम्बन्ध में कुछ आपत्तिजनक कानूनों व अन्य परिस्थितियों ने उपनिवेश की जनता में असंतोष एवं घृणा को बढ़ावा दिया तथा जनता इस शोषणकारी औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी हुई और अंततः उपनिवेशवासियों का स्वतंत्र अस्तित्व स्थापित हुआ |

अमेरिकी क्रांति के कारण (Causes of American Revolution)

अमेरिकी क्रांति के विभिन्न सामाजिक, राजनितिक, आर्थिक एवं धार्मिक कारण थे, लेकिन यह स्वतंत्रता संघर्ष मुख्य रूप से ग्रेट ब्रिटेन तथा उसके उपनिवेशों के मध्य आर्थिक हितों का संघर्ष माना जाता है | इस क्रांति के कारणों को निन्मलिखित बिन्दुओं के तहत समझा जा सकता है –

I) धार्मिक मतभेद

उपनिवेशवासियों और अंग्रेजों के धार्मिक दृष्टिकोण में भिन्नता क्रांति का एक महत्त्वपूर्ण कारण थी. इंग्लैंड के अधिकांश निवासी का Anglicanism (what is Anglicanism, check WIKI)… की तरफ झुकाव था. वे बिशप (Bishop) और धर्म के आधिपत्य पर विश्वास रखते थे, उपनिवेशवासी प्यूरिटन (Puritan) मतावलम्बी थे. वे Anglican मत से घृणा करते थे.  बिशप-व्यवस्था और धर्म के आधिपत्य के विरोधी थे. धार्मिक भिन्नता के कारण उपनिवेशवासी इंग्लैंड के साथ किसी प्रकार का सम्बन्ध नहीं रखना चाहते थे.

II) सामाजिक भिन्नता

अमेरिका की सामाजिक संरचनाइंग्लैंड की सामाजिक संरचना से भिन्न थी.इंग्लैंड का समाज सामंती था जबकि अमेरिका का समाज जनतंत्रात्मक था. इंग्लैंड का समाज रुढ़िवादी और कृत्रिम था, जबकि अमेरिका का समाज मौलिक और आदर्शवादी था. रुढ़िवादी और प्रगतिशील समाज में कभी समन्वय नहीं हो सकता. अंग्रेजों की राजनीति पर धनिकों का प्रभाव था. अंग्रेजी राजनीति में गरीबों के लिए कोई स्थान नहीं था. अमेरिका के समाज में अमीर-गरीब की भावना नहीं थी.

III) असंतोषजनक शासन-प्रणाली

उपनिवेशों में बसनेवाले अंग्रेज अपने साथ इंग्लैंड की मान्यताएँ और संस्थाएँ भी लेते आये थे. उपनिवेशों की शासन-प्रणाली असंतोषजनक थी. कार्यकारिणी और व्यस्थापिका में निरंतर संघर्ष होता रहता था. उपनिवेश का गवर्नर इंग्लैंड के राजा नियुक्त होता था. गवर्नर को विशेषाधिकार प्राप्त था. वह व्यवस्थापिका सभा भी गवर्नर के वेतन को रोककर उस पर नियंत्रण रख सकती थी. उपनिवेशवासी व्यवस्थापिका सभा को सर्वशक्तिशाली संस्था मानते थे लेकिन ब्रिटेन की सरकार उसे अधीनस्थ एवं स्थानीय संस्था मानती थी. फलतः दोनों में संघर्ष स्वाभाविक था.

उपनिवेशवासियों को राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा गया था. ब्रिटिश शासकों का विचार था कि उपनिवेशवासियों में शासन करने की योग्यता नहीं है. इसलिए बड़े-बड़े पदों  पर अंग्रेजों को ही नियुक्ति किया जाता था. ब्रिटिश सरकार की इस नीति से भी उपनिवेशवासी असंतुष्ट थे.

IV) जातीय समानता

उपनिवेशवासियों की धमनियों में  भी अंग्रेजी रक्त प्रवाहित हो रहा था. वे भी अंग्रेजों की तरह स्वतंत्रता और स्वराज्य के पुजारी थे और गुलामी की जंजीर को तोड़ देना चाहते थे. अपनी ही जाति के लोगों द्वारा शासित होना उपनिवेशवासियों को अरुचिकर प्रतीत होता था.

V) उपनिवेशवासियों का ब्रिटेन के प्रति रुख

इंग्लैंड के सताए हुए कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट ही उपनिवेशों में जाकर बसे थे. वे वहाँ स्वतंत्रता की साँस लेना चाहते थे. किन्तु जब इंग्लैंड की सरकार ने उपनिवेशों को भी अत्याचार और अन्याय का अखाड़ा बना दिया तो वे विद्रोह कर उठे.

VI) स्वायत्त शासन की भावना का विकास

अमेरिका की भौगोलिक स्थिति के कारण इंग्लैंड की सरकार उपनिवेशों के मामलों में दिलचस्पी नहीं ले रही थी. दूरी और यातायात के साधनों  के अभाव के कारण इंग्लैंड की सरकार उपनिवेशों पर नितंत्रण रखने में असमर्थ थी. इसलिए उपनिवेशवासियों ने शासन सम्बन्धी समस्याओं का समाधान स्वयं खोज निकला और उनमें स्वशासन की भावना जगी. इंग्लैंड की प्रजातांत्रिक परम्परा में  पीला उपनिवेशवासी उत्तरदायी शासन के गुणों का उपयोग करना चाहते थे.

VII) बुद्धिजीवी वर्ग का नेतृत्व

जनक्रांति का नेतृत्व हमेशा ही बुद्धिजीवी वर्ग करता है. उपनिवेशवासियों को संघर्ष का नारा अंग्रेजों से ही मिला था. जॉन लॉक, रूसो, वाल्टेयर, मांटेस्क्यू जैसे दार्शिनकों का प्रभाव उपनिवेशवासियों पर पड़ा था. टॉमस पेन, जेम्स ओरिस जैसे लेखकों ने राजा के दैवी अधिकार के विरुद्ध आवाज़ उठाई, इससे भी लोगों में जागरण आया.

VIII) व्यापारिक एवं औद्योगिक प्रतिबंध

उपनिवेशों के वाणिज्य-व्यवसाय पर अनेक प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए थे. वे इंग्लैंड के साथ व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता नहीं कर सकते थे और न इंग्लैंड के शत्रु-देशों के साथ व्यापारिक सम्बन्ध कायम कर सकते थे. वस्तुओं के आयात-निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा हुआ था. इंग्लैंड और उपनिवेशों के बीच तथा उपनिवेशों एवं अन्य  यूरोपीय देशों के बीच वस्तुओं का आयात-निर्यात ब्रिटिश जहाज़ों के द्वारा ही होता था. कुछ व्यापार सम्बन्धी कानून भी थे. कुछ वस्तुएँ कपास, चीनी, तम्बाकू केवल इंग्लैंड ही भेजी का सकती थीं. वस्तुओं के उत्पादन पर भी प्रतिबंध लगाया गया था. उपनिवेशवासी लोहा, सूती कपड़ों जैसी आवश्यक वस्तुओं का उद्योग अपने यहाँ अलग नहीं कर सकते थे. औद्योगिक एवं व्यापारिक प्रतिबंधों के कारण उपनिवेशों की औद्योगिक एवं व्यापारिक प्रगति नहीं हो रही थी. इससे उपनिवेशवासी काफी असंतुष्ट थे और वे परतंत्रता की बेड़ी को तोड़ देना चाहते थे.

IX) सप्तवर्षीय युद्ध के परिणाम

इस युद्ध के परिणामस्वरूप उपनिवेशवासियों में आत्मविश्वास की भावना जगी. अमेरिकन सैनिकों ने अंग्रेज़ सैनकों के साथ मिलकर फ्रांस का मुकाबला युद्ध में किया था. उन्हें विश्वास हो गया कि वे अंग्रेजों से अच्छा लड़ सकते हैं. आर्थिक स्थितियाँ में सुधार और शिक्षा के विकास के कारण उपनिवेशों में मध्यम वर्ग का जन्म हुआ जो राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए प्रयास करने लगा. इस वर्ग के लोग स्वतंत्रता के इस संग्राम (American Revolution) के अग्रदूत बने.

X) तात्कालिक कारण

अमेरिका के स्वतंत्रता-संग्राम (American Revolution) का तात्कालिक ग्रेनविल के कुछ आपत्तिजनक कार्य थे. सप्तवर्षीय युद्ध के परिणामस्वरूप आर्थिक संकट पैदा हो गया था. किसान और मजदूर अपनी सीमा से बाहर जाकर आदिवासियों की भूमि आबाद करना चाहते थे, लेकिन ग्रेनविल ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया. ग्रेनविल ने नेविगेशन एक्ट कड़ाई से लागू किया. चोरबाजारी सम्बन्धी मामलों की जाँच के लिए admiralty court की स्थापना की गई. 1733 ई. में Molasses Act बना – . a British law that imposed a tax on molasses, sugar, and rum imported from non-British foreign colonies into the North American colonies. ग्रेनविल ने चुंगी की वसूली में सख्ती दिखलाई. बंदरगाहों पर अंग्रेज कर्मचारी तैनात किए गए और टैक्स नहीं देनेवालों के घर की तलाशी ली जाती थी.  1765 में Stamp Act बनाया गया. अब अखबारों, कानूनी कागजातों, बंधक सम्बन्धी दस्तावेजों और इश्तहारों पर सरकारी टिकट लगाना अनिवार्य कर दिया गया. इस कानून के कारण उपनिवेशों के पात्र-प्रकाशकों, इश्तहार निकाल्नेवालों, वकीलों, व्यापारियों को भारी क्षति उठानी पड़ी. उपनिवेशवासियों के विरोध के कारण 1766 ई. में स्टाम्प एक्ट को बंद कर दिया गया. लेकिन यह स्पष्ट कर दिया गया कि ब्रिटिश सरकार को उपनिवेशों पर कर लगाने का अधिकार है.

अमेरिकी क्रान्ति का प्रभाव

  1. अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध की वास्तविक महत्ता न तो स्पेन या फ्रांस के प्रादेशिक लाभों, न
    हॉलैण्ड की व्यापारिक क्षतियों तथा इंग्लैण्ड के साम्राज्य की अवनति में ही थी, वरन् इसकी वास्तविक
    महत्ता अमेरिकी क्रांति के सफल संपादन में पायी जाती है। इसने दैवी अधिकार पर आधारित राजतंत्र
    तथा कुलीनतंत्रीय एकाधिकार पर घातक प्रहार किया। 
  2. अमेरिकी स्वतंत्रता के युद्ध द्वारा इंग्लैण्ड में ‘रक्तहीन राज्यक्रांति’ द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत का
    और अधिक विकास हुआ। इसने संसद, प्रतिनिधि संस्था, जनता की प्रभुसत्ता व जनतंत्र की प्रतिष्ठा
    स्थापित की, अर्थात् इसने ब्रिटिश जनंतत्र की नींव डाली। 
  3. इस युद्ध का फ्रासं पर भयानक प्रभाव पड़ा। जिन फ्रासीसी सैनिकों ने इस युद्ध में भाग लिया
    था, वे अमेरिकी रहन-सहन व शासन पद्धति से बड़े प्रभावित हुए। अत: स्वदेश लौटने पर उन्होंने फ्रांस
    में अमेरिकी संस्थाओं जैसी व्यवस्थाओं की माँग की। इसके फलस्वरूप 1789 ई. में फ्रासीसी राज्य क्रांति
    का प्रारंभ हुआ। इस युद्ध के कारण फ्रांस की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गयी। इस आर्थिक स्थिति
    के कारण ही फ्रांस का दिवाला निकल गया और राज्य क्रांति का विस्फोट हुआ। 
  4. इस युद्ध के परिणामस्वरूप एग्लो- सैक्सन साम्राज्य के दो टुकड़े हो गये जिसके फलस्वरूप
    इंग्लैण्ड तथा अमेरिका के बीच मनमुटाव उत्पन्न हो गया। यह मनमुटाव काफी समय तक चलता रहा। 
  5. यूरोप की राजनीति पर अमेरिकी युद्ध का बड़ा महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा। अमेरिकी लोगों के
    हृदय में स्वतंत्रता की जो ज्योति जागतृ हइुर् ओर उन्होने जिस प्रकार इंग्लैण्ड से स्वतंत्र होकर एक
    प्रजातंत्र की स्थापना कर ली, इसका फ्रांसीसियों के विचारों और कल्पना पर गहरा प्रभाव पड़ा। अत:
    फ्रांसीसियों ने भी एक प्रजातंत्र की कल्पना कर डाली और फलस्वरूप शीघ्र ही फ्रांस में राज्यक्रांति
    आरंभ हुई। 
  6. आयरलैण्ड पर भी अमेरिकी युद्ध की सफलता का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा। अमेरिका में अपनी
    पराजय से ब्रिटिश सरकार भयभीत हो गयी थी, अत: उसने आयरिश जनता की माँग पूरी कर दी। इस
    प्रकार 1800 ई. में यंगर पिट ने एक्ट ऑफ यूनियन पास कर ब्रिटिश संसद के साथ आयरिश संसद को
    मिला दिया और इस प्रकार आयरलैण्ड की समस्या का समाधान हो गया। 
  7. अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध के कारण ब्रिटिश साम्राज्य के विभिन्न भागों में अनेक प्रशासकीय तथा
    वैधानिक सुधार किये गये। भारतवर्ष में स्थित ईस्ट इण्डिया कंपनी के कायोर्ं पर विभिन्न प्रकार के
    नियंत्रण रखे गये, जिससे कहीं भारतवर्ष भी अमेरिका की भाँति स्वतंत्रता न प्राप्त कर ले। 
  8. अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध के परिणामस्वरूप ही ब्रिटिश सरकार को कई आर्थिक समस्याओं का
    सामना भी करना पड़ा।

पुनर्जागरण का अर्थ और पुनर्जागरण के कारण

 

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shubham yadav

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